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मेहनत का पेड़ कभी सूखता नहीं | प्रेरणादायक कहानी | हिंदी मोटिवेशनल स्टोरी

मेहनत का पेड़ कभी सूखता नहीं | प्रेरणादायक कहानी | हिंदी मोटिवेशनल स्टोरी

मेहनत का पेड़ कभी सूखता नहीं | प्रेरणादायक कहानी | हिंदी मोटिवेशनल स्टोरी

राहुल एक छोटे से कस्बे में रहता था। उसके पिता की एक छोटी सी चाय की दुकान थी। घर का खर्च किसी तरह चल जाता था लेकिन बड़े सपने देखने की हिम्मत बहुत कम लोगों में होती है। राहुल के अंदर भी कई सपने थे मगर हर बार उसे यही सुनने को मिलता कि बड़े सपने सिर्फ बड़े लोगों के लिए होते हैं।

धीरे धीरे उसने भी लोगों की बातों पर विश्वास करना शुरू कर दिया। वह सोचने लगा कि शायद उसकी किस्मत में साधारण जीवन ही लिखा है।

एक दिन दुकान पर एक बुजुर्ग व्यक्ति चाय पीने आए। उन्होंने देखा कि राहुल खाली समय में एक पुरानी किताब पढ़ रहा है। उन्होंने मुस्कुराकर पूछा कि क्या बनना चाहते हो।

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राहुल ने धीमी आवाज में कहा कि बहुत कुछ बनना चाहता हूं लेकिन हालात साथ नहीं देते।

बुजुर्ग ने जवाब दिया कि हालात कभी किसी का साथ नहीं देते। इंसान अपने काम से हालात का साथ लेना सीखता है।

यह बात राहुल के दिल में उतर गई।

उसने तय किया कि अब हर दिन कुछ नया सीखेगा। सुबह पिता की दुकान पर हाथ बंटाता और रात को पढ़ाई करता। छुट्टी के दिन वह लाइब्रेरी जाकर किताबें पढ़ता। इंटरनेट कैफे में जाकर नई नई चीजें सीखता। कई बार पैसे नहीं होते तो वह घंटों पैदल चलकर लाइब्रेरी पहुंच जाता।

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लोग उसका मजाक उड़ाते। कोई कहता इतना पढ़कर क्या मिलेगा। कोई कहता आखिर में चाय की दुकान ही संभालनी है।

राहुल बस मुस्कुरा देता। उसने जवाब देना छोड़ दिया था। अब उसका जवाब सिर्फ उसकी मेहनत थी।

एक साल बाद उसने एक प्रतियोगी परीक्षा दी। परिणाम आया तो उसका चयन नहीं हुआ। कुछ देर के लिए उसका मन टूट गया। उसे लगा शायद लोग सही कहते थे।

उसी शाम उसके पिता ने उसके कंधे पर हाथ रखा और बोले बेटा पेड़ लगाने वाला किसान अगले दिन फल मिलने की उम्मीद नहीं करता। वह रोज पानी देता है क्योंकि उसे अपने परिश्रम पर भरोसा होता है।

पिता की बात सुनकर राहुल फिर से जुट गया।

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इस बार उसने अपनी गलतियों की सूची बनाई। जहां कमजोरी थी वहां ज्यादा समय दिया। उसने अपनी दिनचर्या बदल दी। मोबाइल का उपयोग कम कर दिया। हर दिन का लक्ष्य लिखने लगा और रात को खुद से पूछता कि आज मैंने अपने सपने के लिए क्या किया।

कुछ महीनों बाद उसने फिर परीक्षा दी।

इस बार जब परिणाम आया तो राहुल का नाम चयनित उम्मीदवारों की सूची में था। पूरे कस्बे में खुशी की लहर दौड़ गई। जो लोग कभी उसका मजाक उड़ाते थे वही अब उसकी तारीफ कर रहे थे।

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राहुल ने सफलता मिलने के बाद भी अपनी आदत नहीं बदली। उसने सबसे पहले अपने पिता की चाय की दुकान को नया रूप दिया और वहां एक छोटी सी लाइब्रेरी भी शुरू कर दी ताकि गांव और कस्बे के बच्चे मुफ्त में किताबें पढ़ सकें।

जब किसी ने उससे सफलता का राज पूछा तो उसने सिर्फ इतना कहा कि मेहनत का पेड़ धीरे बढ़ता है लेकिन एक बार फल देना शुरू कर दे तो कई लोगों की जिंदगी बदल देता है।

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जीवन में कोई भी सपना छोटा या बड़ा नहीं होता। छोटा सिर्फ हमारा विश्वास होता है। जिस दिन इंसान खुद पर भरोसा करना सीख जाता है उसी दिन उसकी मंजिल उसके एक कदम और करीब आ जाती है।

याद रखिए सफलता रातों रात नहीं मिलती। वह हर दिन किए गए छोटे छोटे प्रयासों का परिणाम होती है। इसलिए अगर आज मेहनत का फल दिखाई नहीं दे रहा तो निराश मत होइए। बीज को पेड़ बनने में समय लगता है लेकिन जब वह पेड़ बनता है तो वर्षों तक छाया और फल देता है।

जो लोग धैर्य के साथ मेहनत करते रहते हैं उन्हें एक दिन सफलता जरूर मिलती है। इसलिए आज से अपने सपनों की तरफ एक छोटा कदम जरूर बढ़ाइए क्योंकि वही कदम कल आपकी सबसे बड़ी जीत बन सकता है।

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